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Showing posts from April, 2025

जीवन को ‘सही तरीके से’ जीने की दौड़: क्या आप खुद को भूल रहे हैं? मनोविश्लेषक से जानिए क्या खो रहें?

  रॉबर्ट जे. वाल्डिंगर, एक मनोचिकित्सक और मनोविश्लेषक हैं। उन्होंने जीवन के बारे में बताया है। मेरे द्वारा हिंदी में सरल रूप से लिखा गया है, जिसे आप अपने जीवन धारा में लाएं। आप इसे ‘अमर उजाला’ अखबार में पढ़ सकते हैं। सीखने का कोई समय नहीं होता, हर पल सीखें। यदि आपको अभी एक जीवन विकल्प चुनना पड़े, ताकि आप भविष्य में स्वास्थ्य और खुशी के रास्ते पर चल सकें, तो वह क्या होगा? ज्यादातर लोग अमीर बनने को प्राथमिकता देंगे। वहीं, कुछ लोग जीवन में प्रसिद्ध होने को सफलता मानते हैं। लोगों के शीर्ष लक्ष्यों में पैसा कमाना, सफल करियर बनाना, और प्रसिद्ध होना जैसे आम और व्यावहारिक लक्ष्य शामिल हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। भले ही आप एक समय बाद सब कुछ हासिल कर लें, पर ये चीजें अपने आप में खुशहाल जीवन की गारंटी नहीं देतीं। ऐसे लोग अक्सर खुद को पहले जैसा ही महसूस करते हैं। इस बीच, वे पूरे दिन इस सोच में डूबे रहते हैं कि हमें क्या खुशी देगा, हमें अपने जीवन में क्या चाहिए, और कौन जीवन को ‘सही तरीके से’ जी रहा है। हम अक्सर दूसरों की चकाचौंध को देखकर उनके जैसा बनने की ख्वाहिश में जीवन जीना भूल जाते ...

महाराष्ट्र गंजापन रहस्य: बाल झड़ने और नाखून गिरने की रहस्यमयी घटना से देश हैरान, सेलेनियम की अधिकता या कुछ और?

 महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के बोंडगांव में दिसंबर 2024 के अंतिम दिनों और जनवरी 2025 के प्रारंभ में एक अजीब घटना घटी। सुबह जब लोग सोकर उठे, तो उन्होंने पाया कि उनके सिर पर बाल नहीं हैं। रातोंरात गंजे हो गए । यह गंजेपन का पहला मामला बोंडगांव से शुरू होकर आसपास के अन्य गाँवों में भी फैल गया। इसके बाद, देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञ इस रहस्य को सुलझाने में जुट गए। करीब चार महीने बाद, अब वहाँ के लोग 'नाखून गिरने' की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं अचानक से शुरूआत हुए गंजेपन की समस्या को लेकर उस समय पद्मश्री डॉ. हिम्मतराव बावस्कर ने बताया था कि गाँव में राशन के रूप में मिलने वाले गेहूं में सेलेनियम का स्तर अधिक था, जिसके कारण यह समस्या उत्पन्न हुई। आखिर ‘सेलेनियम का स्तर अधिक’ होने से क्या होता है? यदि आपके खाने में सेलेनियम जरूरत से ज्यादा है, तो इससे बालों का झड़ना,  नाखूनों का टूटना, त्वचा पर चकत्ते आदि हो सकते हैं। लेकिन अभी भी मूल कारण का पता नहीं चला है कि इतने सारे लोग अचानक गंजेपन और अब नाखून गिरने की समस्या से क्यों प्रभावित हो रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधा...

पोस्टमॉर्टम, समाज और कुछ खोखली धारणाएँ!

Society Afraid of Postmortem? A Wake-Up Call for Rural India     हमारी पृथ्वी पर वायुमंडलीय दबाव की तरह ही हमारे समाज में कुछ खोखली धारणाएँ हैं, जिन्हें हम बिना सवाल किए ढोते आ रहे हैं। एक पिता अपने गाँव से दूर शहर में दिन-रात मेहनत करता है, ताकि उसके बच्चे अच्छा जीवन जी सकें। लेकिन एक दिन उसे फोन आता है कि उसकी बेटी अब नहीं रही। यह सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वह तुरंत गाँव लौटने के लिए रेलवे स्टेशन पहुँचता है। इधर, गाँव वाले उसकी बेटी के शव को जल्दबाजी में शहर से गाँव ले जाते हैं, ताकि पुलिस उन्हें न पकड़े और पोस्टमॉर्टम न हो। उन्हें इस बात का बहुत डर है, हालाँकि मौत का कारण किसी को नहीं पता। कोई कहता है कि बेटी छत से गिरी, तो कोई इसे आत्महत्या बताता है।  शव गाँव पहुँचते ही लोग राहत महसूस करते हैं, मानो पोस्टमॉर्टम रोककर उन्होंने कोई बड़ा खतरा टाल लिया हो। पिता रेलवे की भीड़ से गुजरते हुए, आँखों में आँसू लिए घर पहुँचता है। एक रिश्तेदार उसे फोन करके कहता है, ‘इस मौत में बहुत संदेह है। कृपया पोस्टमॉर्टम करवाएँ, ताकि सच्चाई सामने आए।’ लेकिन पिता भावनाओं में बहकर...

उदय की उम्मीद: देश में पहली बार चलती ट्रेन में अब एटीएम की सुविधा

 अब आप चलती ट्रेन में भी पैसे निकाल सकेंगे। भारतीय रेलवे ने देश में पहली बार ट्रेन के अंदर ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) की शुरुआत की है। आर्थिक राजधानी मुंबई की पंचवटी एक्सप्रेस में इस एटीएम का सफल परीक्षण किया गया। ‘एटीएम ऑन व्हील्स’ नामक इस अनोखी पहल के तहत, आने वाले समय में भारत की ट्रेनों में यात्री आसानी से नकदी निकाल सकेंगे। उदय कुमार, जो झारखंड के निवासी हैं, बताते हैं कि दो साल पहले जब वे दिल्ली से अपने गाँव जा रहे थे, उनके पास केवल सौ रुपये की नकदी थी। जब ट्रेन रुकी, तो वे रेलवे स्टेशन के पास एटीएम से पैसे निकालने गए। लेकिन, जैसे ही वे पैसे निकाल रहे थे, ट्रेन चल पड़ी। उन्होंने दौड़कर ट्रेन पकड़ने की कोशिश की, पर ट्रेन छूट गई। आज यह खबर सुनकर उनके चेहरे पर निश्चित रूप से मुस्कान आई होगी। #ATMOnWheels #IndianRailways #TrainATM #PanchvatiExpress #MumbaiNews #RailwayInnovation 

प्रकृति ने सिंचा पहाड़ों में जीवन, इंसानों ने खींचा पहाड़ों से जीवन!

सुबह धूप की रोशनी में कुछ तो अलग था, जो मुझे अतिरिक्त खुशी दे रही थी। उस धूपमय वातावरण में वसंत का कोई गीत सुनाई दे रहा था। हम चार दोस्त एक साथ थे। जैसे प्रेम की भाषा शब्दों से परे होती है, वैसे ही हमारी आंखों में एक चमक थी और होठों पर एक अंतरंगी मुस्कान थी। वह दिन मंगलवार, 4 मार्च 2025 का था। हमने ऑनलाइन गाड़ी बुक की थी ताकि दो चीजें हो सकें- एक तो सबके पैसे कम खर्च हों, क्योंकि वह चार हिस्सों में बंट जाएगा, और दूसरा, जो उस दिन खुशी का सबसे बड़ा कारण था, कि हम भारतीय जन संचार संस्थान के 56वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने जा रहे थे। हम सभी उत्साहित थे, क्योंकि हमें अपनी डिग्री मिलने वाली थी- मिजोरम की राजधानी आइजोल में अध्ययन के उन नौ महीनों का परिणाम, जहां हमने पहाड़ों के बीच रहकर न केवल किताबें पढ़ीं, बल्कि जीवन जीना भी सीखा। भारतीय जन संचार संस्थान, दिल्ली के मुख्य परिसर में हमारे मुख्य अतिथि रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी आने वाले थे। नोएडा सेक्टर 62 से हम चार मित्र गाड़ी में बैठे और निकल पड़े। हम सभी पहाड़ों पर चर्चा क...

लुप्त होता ‘वसंत ’, ‘पतझड़’ होता जीवन!

13 हजार वर्ग किलोमीटर से भी अधिक वन क्षेत्र अतिक्रमण के अधीन है, जो देश की राजधानी दिल्ली, सिक्किम और गोवा के कुल भौगोलिक क्षेत्र से भी अधिक है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार है, जिसमें कहा गया है कि 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मार्च 2024 तक 13 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। ये आंकड़े बहुत कुछ कहते हैं। देश की राजधानी से भी अधिक क्षेत्रफल में वन क्षेत्र का अतिक्रमण के अधीन होना न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जानलेवा खतरे को भी आमंत्रित कर रहा है। पर्यावरण जीवन का आधार है। यह हमें साँस लेने के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है और अनगिनत प्रजातियों को रहने के लिए आश्रय देता है। फिर भी, मानव द्वारा विकास के नाम पर पर्यावरण का हर तरह से दोहन लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी कीमत हर किसी को चुकानी पड़ेगी। एक जीता-जागता मामला हैदराबाद के कांचा गाचीबोवली के पास 400 एकड़ में फैले  क्षेत्र का है, जहाँ कई तरह के जीवों का बसेरा है। उसे नष्ट ...

हैदराबाद से कोलकाता तक: क्या महिलाओं की सुरक्षा बस एक फिल्मी संवाद बनकर रह गई है?

हैदराबाद में एक 22 वर्षीय जर्मन महिला ने कार चालक पर कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया है। हैदराबाद पुलिस ने मंगलवार को बताया कि महिला अपने दोस्तों के साथ हैदराबाद घूमने आई थी। सोमवार को शहर की सैर के दौरान कार चालक ने महिला को कुछ अच्छी तस्वीरें लेने के लिए एक जगह का प्रस्ताव दिया और शहर के बाहरी इलाके में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस आगे की जांच में लग गई है। वहीं, 2019 में हैदराबाद के शमशाबाद में एक 26 वर्षीय पशु चिकित्सक के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटना हुई थी। पिछले कुछ समय में ऐसी कितनी घटनाएं हो चुकी हैं?  आंकड़े बहुत कुछ कहते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिदिन 80 से अधिक बलात्कार होते हैं, जिसका मतलब है कि हर दिन लगभग तीन बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज होती है।  कुछ दिन पहले कर्नाटक में एक इजरायली और एक स्थानीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।  वहीं, एक साल पहले झारखंड के दुमका में सात लोगों ने कथित तौर पर एक स्पेनिश महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था।  क्या आजाद भारत में बलात्कार...