Posts

क्या नंगे पांव चलना सच में सेहत के लिए फायदेमंद है? जानिए ग्राउंडिंग के राज!

Image
क्या आपने कभी घास पर नंगे पांव चलते हुए अप्रत्याशित शांति के साथ अनोखेपन को महसूस किया है? क्या आपने गौर किया है, जब आप नदी, नहर या समुद्र की लहरों के किनारे होते हैं, तो कैसे तनाव कम होने लगता है? यदि ऐसा महसूस किया है, तो शायद आपने अनजाने में खुद को ‘धरती से जोड़’ लिया है, यानी ‘ग्राउंडिंग’ की है। ग्राउंडिंग, या अर्थिंग का अर्थ है अपने शरीर को सीधे धरती की सतह से जोड़ना। हमारे पूर्वज बिना जूतों के  अधिकांश समय धरती पर चलते थे, अनजाने में ही उन्होंने ‘इस चलन’ को अपना लिया था। लेकिन आजकल घरों में मैट, सड़कें, और यहां तक जूते की वजह से हम धरती से कम जुड़ पाते हैं। और कहीं न कहीं अब लोग  नंगे पांव चलने को एक अजीब नाज़िए से देखते हैं ।  लेकिन  कहा जाता है कि ग्राउंडिंग से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है, और दर्द में राहत मिलती है। लेकिन अभी इसके फायदों के बारे में पक्के सबूत कम हैं। आजकल सोशल मीडिया रील्स के जरिये ग्राउंडिंग से जुड़े कई उत्पादों की बात हो रही है, जैसे ग्राउंडिंग मैट या बेडशीट, जो अच्छी नींद का दावा करते हैं। क्या यह वाकई सेहत के लिए बेहतर है? मानव शरी...

कैंसर कैसे होता है? हर इंसान के डीएनए में छुपा है कैंसर का रहस्य!

Image
यह वाकई एक मुश्किल प्रश्न है। बहुत सारे लोग इसका जवाब खोजने की कोशिश कर रहे हैं। कैंसर क्यों होता है, इसे समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि कैंसर कैसे होता है? शरीर की रचना कोशिकाओं (सेल्स) से होती है। इन्सान के शरीर में सैकड़ों तरह की कोशिकाएं होती हैं, सभी का काम करने का खास तरीका होता है। ये कोशिकाएं हमारी त्वचा, मस्तिष्क और हड्डियां और दूसरे अंग बनाती हैं। कुछ कोशिकाएं (जैसे मस्तिष्क और हड्डी) कई वर्षों तक जीवित रहती है, जबकि कुछ जैसे, लाल रक्त कोशिकाएं, केवल कुछ हफ्तों तक जीवित रहती हैं। शरीर में, खरबों तारों से भी कहीं ज्यादा कोशिकाएं हैं! जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, शरीर नई कोशिकाएं बनाती हैं। जब पुरानी कोशिकाएं मर जाती हैं, उनकी जगह नई कोशिकाएं ले लेती हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है। कभी-कभी उन खरबों कोशिकाओं में से एक अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है और मरती नहीं है। यह बेकाबू कोशिका बार-बार विभाजित होती है और अपनी लाखों-करोड़ों कॉपियां बना लेती है। इससे एक गांठ (ट्यूमर) बन सकती है। ये कोशिकाएं शरीर के सभी भागों में फैल सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर सकत...

गोल्डन शावर ट्री: भारत की सड़कों पर सोने के आभूषण पहने ‘आरग्वध’

Image
इस धरातल पर हम थोड़े समय के लिए आए हैं। जल्दबाजी मत करो, चिंता मत करो। सबसे जरूरी बात, रास्ते में फूलों की खुशबू का आनंद लेना न भूलें। बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरे जीवन में आपने शायद अपने चारों ओर इस तपती हुई गर्मी में बारिश की बूंदों की तरह गिरते हुए पीले फूलों को नजरअंदाज कर दिया होगा। वे मनमोहक फूल भारत के कई शहरों में हैं, जो केरल का राजकीय फूल है, और दिल्ली के गोल्डन झुमके कहे जा सकते हैं। यह शहरों को सुनहरा बनाता है। बस एक पल रुकें, और सड़क के दोनों किनारों पर आपको पीले फूलों से ढके पेड़ नजर आएंगे, जिन्हें आप गोल्डन शावर ट्री या अमलतास के नाम से बुला सकते हैं। ये किसी भी शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। अमलतास के सुनहरे फूल भारत के कई शहरों की शोभा बढ़ाते हैं, जिनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, और पुणे प्रमुख हैं। इन महानगरों के साथ-साथ, यह खूबसूरत वृक्ष कई अन्य शहरों और कस्बों की गलियों में भी अपनी पहचान बनाए रखता है। जब गर्मी की दस्तक होती है, तो अमलतास अपनी स्वर्णिम छटा बिखेरना शुरू कर देता है। आमतौर पर, मई से जून के बीच, भारत के वा...

पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ? से लेकर डायनासोर की विनाश तक की अनसुनी कहानी

Image
पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ, यह पता लगना सरल नहीं है, क्योंकि इसका निर्माण 4.5 अरब साल पहले हुआ था। इसलिए वैज्ञानिकों को यह देखना पड़ा कि पृथ्वी अब कैसी दिखती है, तथा सौरमंडल के अन्य ग्रह, चंद्रमा और मलबा कैसा दिखता है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी का निर्माण उसी तरह से हुआ, जिस तरह से हम बर्फ के गोले से स्नोमैन बनाते हैं। वह पिंड जो हमारा घर (पृथ्वी) बना, अंतरिक्ष में तैरते हुए चट्टानों के मलबे 10 करोड़ साल से ज्यादा तक घूमता रहा। धीरे-धीरे इसमें इतने पदार्थ जुड़ते गए कि यह एक पूर्ण ग्रह बन गया।   वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में मौजूद क्षुद्रग्रहों (एस्टेरॉयड) और धूमकेतुओं (कॉमेट) के आकार, संरचना और स्थान का अध्ययन किया, तो पता चला कि यह 4.5 अरब साल पहले हमारा सौरमंडल आज के शनि ग्रह जैसा दिखता था, जहां सू्र्य के चारों ओर चट्टानों के छल्ले चक्कर लगते थे। अभी भी सूर्य के चारों ओर एक ऐसा छल्ला है, जिसे क्षुद्रग्रह पट्टी कहते हैं।सभी ग्रह चट्टानों के छल्लों से शुरू हुए थे और मलबे बर्फ के गोले की तरह बढ़ने लगे। मलबे के ये टुकड़े क्षुद्रग्रह थे, जो निर्मित हो रहे ग्रहों से तेजी से...

S-400 'सुदर्शन चक्र' ने किया पाकिस्तान के मिसाइल हमलों को नाकाम, जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट और ब्लैकआउट

Image
 पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के हवाई अड्डे सहित सतवारी, सांबा, आरएस पुरा और अरनिया सेक्टर में 8 मिसाइलें दागीं, सभी को भारत ने अपनी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। जम्मू संभाग के सांबा और पंजाब के अमृतसर में पूर्ण ब्लैकआउट लागू किया गया है। S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम रूस निर्मित S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, जिसे भारत में ‘सुदर्शन चक्र’ के नाम से जाना जाता है, ने इन हमलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रणाली 600 किलोमीटर की दूरी से लक्ष्यों को ट्रैक और 400 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है। भारत और रूस ने 35,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत पांच S-400 सिस्टम की खरीद के लिए समझौता किया था, जिनमें से तीन भारत को प्राप्त हो चुके हैं, और शेष दो 2026 तक मिलने की उम्मीद है। हार्पी ड्रोन हार्पी ड्रोन निगरानी, सटीक हमलों और रडार सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इन्हें ज़मीन या किसी विशेष क्षेत्र से लॉन्च किया जाता है, जो इलाके की निगरानी और लक्ष्यों की पहचान करने में सक्षम हैं। लक्ष्य ...

साबुन जीवन का हिस्सा कैसे बना, आखिर ये साबुन कैसे काम करता है?

Image
आज दुनिया भर में हर साल लगभग ‘50 अरब डॉलर’ सिर्फ विभिन्न तरह के साबुन पर खर्च होते हैं।  दुनिया भर में करोड़ों लोग रोज साबुन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से एक आप भी हैंं लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कैसे काम करता है। साबुन कैसे काम करता जानने से पहले हमें  यह पता होना चाहिए कि यह हमारे जीवन का हिस्सा कैसे बना?   किस्से के मुताबिक हजारों वर्ष पहले,  किसी के भोजन में मौजूद वसा राख में गिर गई। वे यह देखकर हैरान रह गए कि वसा और राख के मिलने से एक ऐसा पदार्थ बना, जो चीजों को साफ कर सकता था। उस समय में यह उन्हें किसी जादू से कम नहीं लगा। खैर, यह तो एक किंवदंती है, पर सच्चाई यह है कि साबुन की खोज लगभग पांच हजार वर्ष पहले दक्षिणी मेसोपोटामिया के प्रचीन शहर बेबोलीन (आज का इराक) में हुई थी। समय के साथ दुनिया भर के लोग साबुन का इस्तेमाल करने लगे। 1600 तक अमेरिकी उपनिवेशों में साबुन का उपयोग आम हो गया था, जो तब लोग इसे घर पर ही बनते  थे। साल 1791 में फ्रांस के रसायनशास्त्री निकोलस लेब्लांक ने पहली बार साबुन बनाने की प्रक्रिया का पेटेंट करवाया।  सबसे जरूर  ...

मुंबई: बेटी से 3 साल तक बलात्कार करने वाले पिता को सजा, 90 प्रतिशत बलात्कार के मामलों में परिचित लोग

Image
भारत की आर्थिक राजधानी ‘मुंबई’ की एक अदालत ने एक व्यक्ति को अपनी ही बेटी के साथ तीन साल तक बलात्कार करने के मामले में दोषी ठहराया और उसे 20 साल की सजा सुनाई। आरोपी ने 2017 से, जब उसकी बेटी केवल 13 वर्ष की थी, उसका यौन शोषण शुरू किया। पीड़िता ने अपनी मौसी को इस बारे में बताया, लेकिन उन्होंने इसे अनदेखा कर दिया। इसके बाद, पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और 14 फरवरी 2020 को चाइल्डलाइन पर कॉल कर घटना की जानकारी दी।आरोपी पिता स्वीपर का काम करता था और अक्सर शराब पीकर घर आता था। पीड़िता की मां की मृत्यु तब हो गई थी, जब वह केवल पांच साल की थी। पीड़िता ने बताया कि 2017 में उसके पिता ने शराब के नशे में उसके साथ यौन शोषण किया। विरोध करने पर उसने उसे गालियां दीं, पीटा और धमकी दी कि ‘अगर तू ज्यादा बोलेगी, तो काट डालूंगा।’  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2014 में, देश में लगभग 90 प्रतिशत बलात्कार के मामलों में पीड़ितों के परिचित, जैसे पड़ोसी, दोस्त, परिवार के सदस्य, कार्यस्थल के लोग, ऑनलाइन दोस्त, लिव-इन पार्टनर या पूर्व पति शामिल थे। ये घटनाएं आंध्र प्रदेश, मिजोरम...