साबुन जीवन का हिस्सा कैसे बना, आखिर ये साबुन कैसे काम करता है?
आज दुनिया भर में हर साल लगभग ‘50 अरब डॉलर’ सिर्फ विभिन्न तरह के साबुन पर खर्च होते हैं। दुनिया भर में करोड़ों लोग रोज साबुन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से एक आप भी हैंं लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कैसे काम करता है। साबुन कैसे काम करता जानने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि यह हमारे जीवन का हिस्सा कैसे बना? किस्से के मुताबिक हजारों वर्ष पहले, किसी के भोजन में मौजूद वसा राख में गिर गई। वे यह देखकर हैरान रह गए कि वसा और राख के मिलने से एक ऐसा पदार्थ बना, जो चीजों को साफ कर सकता था। उस समय में यह उन्हें किसी जादू से कम नहीं लगा।
खैर, यह तो एक किंवदंती है, पर सच्चाई यह है कि साबुन की खोज लगभग पांच हजार वर्ष पहले दक्षिणी मेसोपोटामिया के प्रचीन शहर बेबोलीन (आज का इराक) में हुई थी। समय के साथ दुनिया भर के लोग साबुन का इस्तेमाल करने लगे। 1600 तक अमेरिकी उपनिवेशों में साबुन का उपयोग आम हो गया था, जो तब लोग इसे घर पर ही बनते थे। साल 1791 में फ्रांस के रसायनशास्त्री निकोलस लेब्लांक ने पहली बार साबुन बनाने की प्रक्रिया का पेटेंट करवाया।
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सबसे जरूर बात आखिर ये साबुन कैसे काम करता है? इसको समझने के लिए जल को समझना जरूरी है।
पानी दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु से मिलकर बना होता है। पानी में घुल जाने वाले अणुओं को ‘हाइड्रोफिलिक’ (जल-प्रेमी) कहते हैं। जबकि पानी में नहीं घुलने वाले अणुओं को ‘हाइड्रोफोबिक’ कहते हैं। जैसे कि तेल या चिकनाई, जिसे सिर्फ पानी से नहीं हटाया जा सकता।
साबुन में हाइड्रोफिलिक और हाइड्रोफोबिक, दोनों गुण होते हैं। टेडपोल (मेढ़क के बच्चे) की तरह साबुन के अणु का सिर गोल और पूंछ लंबी होती है; सिर हाइड्रोफिलिक होता है, तथा पूंछ हाइड्रोफोबिक होती है। ये ही गुण साबुन को फिसलनयुक्त और सफाई में असरदार बनाते हैं। गंदगी हाइड्रोफिलिक और हाइड्रोफोबिक दोनों का मिश्रण होता है। इसलिए सिर्फ पानी से हाथ धोने पर सिर्फ गंदगी का हाइड्रोफिलिक हिस्सा दूर होता है, लेकिन साबुन से हाथ धोने पर हर तरह की गंदगी दूर हो जाती है। साबुन के अणु आपस में मिलकर गंदगी को चारों ओर से घेर लेते हैं, जिससे मिसेल संरचना बनती है। यह संरचना बुलबुले की तरह दिखती है, जो गंदगी को फंसा लेती है और बहता पानी इसे पूरी तरह से धो देता है।
शरीर में कई तरह के सूक्ष्मजीव होते हैं, जैसे कि बैक्टीरिया, वायरस और फंगस। स्नान नहीं करने पर ये शरीर में बदबू पैदा करते हैं। साबुन इन सूक्ष्मजीवों की बाहरी झिल्ली को तोड़ देता है और पानी उनके शरीर के अवशेषों को धो देता है। इसलिए कम से कम बीस सेकंड तक साबुन से रगड़-रगड़कर हाथ धोने चाहिए। है न दिलचस्प बात हर दिन आपके जीवन का हिस्सा बने साबुन की छोटी-सी टिकिया ने सदियों से मानव सभ्यता को सुरक्षित रखा है! इस बदलती जीवनशैली में हाथ साबुन से धोते रहे हैं।
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