पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ? से लेकर डायनासोर की विनाश तक की अनसुनी कहानी
पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ, यह पता लगना सरल नहीं है, क्योंकि इसका निर्माण 4.5 अरब साल पहले हुआ था। इसलिए वैज्ञानिकों को यह देखना पड़ा कि पृथ्वी अब कैसी दिखती है, तथा सौरमंडल के अन्य ग्रह, चंद्रमा और मलबा कैसा दिखता है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी का निर्माण उसी तरह से हुआ, जिस तरह से हम बर्फ के गोले से स्नोमैन बनाते हैं। वह पिंड जो हमारा घर (पृथ्वी) बना, अंतरिक्ष में तैरते हुए चट्टानों के मलबे 10 करोड़ साल से ज्यादा तक घूमता रहा। धीरे-धीरे इसमें इतने पदार्थ जुड़ते गए कि यह एक पूर्ण ग्रह बन गया।
वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में मौजूद क्षुद्रग्रहों (एस्टेरॉयड) और धूमकेतुओं (कॉमेट) के आकार, संरचना और स्थान का अध्ययन किया, तो पता चला कि यह 4.5 अरब साल पहले हमारा सौरमंडल आज के शनि ग्रह जैसा दिखता था, जहां सू्र्य के चारों ओर चट्टानों के छल्ले चक्कर लगते थे। अभी भी सूर्य के चारों ओर एक ऐसा छल्ला है, जिसे क्षुद्रग्रह पट्टी कहते हैं।सभी ग्रह चट्टानों के छल्लों से शुरू हुए थे और मलबे बर्फ के गोले की तरह बढ़ने लगे। मलबे के ये टुकड़े क्षुद्रग्रह थे, जो निर्मित हो रहे ग्रहों से तेजी से टकराते थे। इनके टकराने की गति 65,000 से 80,000 किलोमीटर प्रति घंटा की होती थी, जिससे बहुत बड़े विस्फोट हुए, जिससे भारी मात्रा में धूल और टूटी या पिघली हुई चट्टानें निकलीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा भी कभी पृथ्वी का हिस्सा था। पर एक विशाल क्षुद्रग्रह ने पृथ्वी को जोर से टक्कर मारी और उसका एक हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में चला गया, जो चंद्रमा बना।अधिकांश क्षुद्रग्रह और धूमकेतु पृथ्वी से 4.5 अरब साल पहले टकराए। उसके बाद से ऐसी टक्करें धीरे-धीरे कम होती गईं। हालांकि, आज भी हर दिन लगभग 100 टन धूल जैसे छोटे अंतरिक्ष कण पृथ्वी पर गिरते हैं, जिससे पृथ्वी का आकार थोड़ा-थोड़ा बढ़ता जा रहा है।
पृथ्वी अंतरिक्ष की चट्टानों से भी टकराती है, जिन्हें उल्का कहा जाता है, जो रात के आकाश में टूटते हुए तारों के रूप में दिखाई देते हैं।करीब 6.5 करोड़ वर्ष पहले, एक विशाल क्षुद्रग्रह पृथ्वी के उस भाग में टकराई थी, जहां मेक्सिको की खड़ी है। इस विस्फोट से डायनासोर विलुप्त हो गए।
हाल ही में, 1908 में रूस के तुंगुस्का में एक क्षुद्रग्रह हवा में फट गया, जिसने 2,150 वर्ग किलोमीटर में पेड़ों को उड़ा दिया। सौभाग्य से, वहां कोई नहीं रहता था, इसलिए कोई जान की हानि नहीं हुई। जब पृथ्वी अंतरिक्ष के मलबे से बन गई, तो कई प्रक्रियाओं ने इसकी सतह को आकार देना जारी रखा। हवा, पानी, गर्मी और ठंड ने चट्टानों को तोड़ा और मिट्टी को बहाया। पृथ्वी की सतह के टुकड़े आपस में टकराकर पहाड़ बनाते हैं। नदियां और हिमनद (ग्लेशियर) सतह को चिकना करते हैं। पृथ्वी एक जीवंत ग्रह है, जो लगातार बन और बदल रहा है। ये प्रक्रियाएं अगले अरबों साल तक चलती रहेंगी।
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लेख: नितिश कुमार – पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ?
By Nitish Kumar.– How was Earth formed

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