अमेरिकी महिला ने बताया भारत में बच्चों की परवरिश करना अमेरिका से बेहतर क्यों.
विदेश की चकाचौंध अक्सर लोगों को आकर्षित करती है, और कई लोग अमेरिका जैसे देशों में बसने का सपना देखते हैं। इस सपने को पूरा करने के लिए कुछ लोग गैर-कानूनी तरीकों का सहारा लेते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनका सब कुछ घर, परिवार, पैसा और यहाँ तक कि जीवन भी दाँव पर लग जाता है। इसके पीछे कानून की कमियाँ तो हैं ही, साथ ही बेईमान अप्रवासी एजेंट भी लोगों को विदेश ले जाने के नाम पर ठगते हैं। जो लोग इस चमक-दमक में अपने देश की असली खूबियों को नहीं देख पाते, उन्हें अमेरिकी मूल की क्रिस्टन फिशर से प्रेरणा लेनी चाहिए। क्रिस्टन का मानना है कि अमेरिका में बच्चों की परवरिश करने की तुलना में भारत में यह करना कहीं बेहतर है।
लगभग चार साल पहले भारत आईं क्रिस्टन फिशर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनका एक बच्चा गली में चल रहा है। वीडियो के ऊपर लिखा था, "भारत में पले-बढ़े बच्चों को क्या लाभ होंगे?" अपने कैप्शन में उन्होंने कई कारण बताए कि भारत में बचपन बिताना अमेरिका से बेहतर क्यों है। ये कारण इस प्रकार हैं:
1. सांस्कृतिक जागरूकता और अनुकूलनशीलता: भारत में बच्चे विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और रीति-रिवाजों की समृद्ध विविधता के संपर्क में आते हैं। इससे उन्हें दूसरी संस्कृतियों के प्रति गहरी समझ और सम्मान विकसित करने में मदद मिलती है, जो खुले विचारों और अनुकूलनशीलता को बढ़ावा देता है।
2.बहुभाषिकता: भारत में हर कुछ कोस पर बोली बदल जाती है। यहाँ बच्चे हिंदी, अंग्रेजी और अन्य स्थानीय भाषाओं से परिचित हो सकते हैं। बहुभाषी होना संज्ञानात्मक विकास को बढ़ाता है, संचार कौशल में सुधार करता है और भविष्य में रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाता है।
3.वैश्विक दृष्टिकोण: भारत में पले-बढ़े बच्चे वैश्विक मुद्दों, क्षेत्रीय चुनौतियों और सामाजिक मानदंडों को गहराई से समझते हैं। इससे उन्हें एक सूक्ष्म वैश्विक नागरिकता का दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलती है।
4.लचीलापन और स्वतंत्रता: किसी नए देश में रहते हुए बच्चों को नई स्कूल प्रणाली और स्थानीय परंपराओं के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। यह अनुभव उनके लचीलापन, समस्या-समाधान कौशल और स्वतंत्रता को मजबूत करता है।
5.भावनात्मक बुद्धिमत्ता: भारत की विविध सामाजिक संरचनाओं और पारिवारिक व्यवस्थाओं के संपर्क से बच्चे भावनात्मक संकेतों को समझना और विभिन्न लोगों के साथ संवाद करना सीखते हैं। इससे उनकी सहानुभूति और सामाजिक कौशल बढ़ता है।
6.भावनात्मक बुद्धिमत्ता: भारत की विविध सामाजिक संरचनाओं और पारिवारिक व्यवस्थाओं के संपर्क से बच्चे भावनात्मक संकेतों को समझना और विभिन्न लोगों के साथ संवाद करना सीखते हैं। इससे उनकी सहानुभूति और सामाजिक कौशल बढ़ता है।
7. सादगी और कृतज्ञता: भारत जैसे देश में, जहाँ धन और गरीबी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है, बच्चे सादगी, कृतज्ञता और अपने पास मौजूद चीजों की कीमत समझना सीखते हैं।
8.वैश्विक नेटवर्क: भारत में बच्चे दुनिया भर के लोगों से दोस्ती करते हैं, जो भविष्य में उनके करियर के लिए एक मजबूत वैश्विक नेटवर्क का आधार बन सकता है।
क्रिस्टन फिशर का यह दृष्टिकोण उन लोगों के लिए एक सबक है जो विदेश के आकर्षण में अपने देश की वास्तविक क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं। भारत न केवल बच्चों के लिए एक समृद्ध और विविध परिवेश प्रदान करता है, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यवान सबक भी सिखाता है।
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