भगवान भी स्वर्ग से आ जाएं, तब भी सुधार होने में कई वर्ष लगेंगे: डीके शिवकुमार

 कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार बंगलूरू में अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या को स्वीकारते हुए कहा कि अगर दैवीय हस्तक्षेप भी हो जाते, तब भी यहां कोई सुधार नहीं होगा। उन्होंने कहा, यदि भगवान भी स्वर्ग से आ जाएं, तब भी बंगलूरू में सुधार होने में कम से कम एक, दो या तीन साल लग जाएंगे। स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। हमें उचित योजना के साथ उसे प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करने की आवश्यकता है। भारत की सिलिकॉन वैली के नाम से मशहूर बंगलूरू अपने ट्रैफिक जाम के लिए बदनाम है। हर तबके के लोग अपने सपने लिए शहरों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। बंगलूरू की आबादी पिछले दो दशक में 70 लाख से सीधे 1.4 करोड़ हो गई है। एक प्रमुख आईटी और शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित हुए शहर ने सबका ध्यान अपनी और आकर्षित किया है, लेकिन इस शहर की बढ़ती संख्या बचपन में सुनी हुई एक कहानी की याद दिलाती है, जिसमें एक घर में एक रोटी और खाने वाले दस हैं, जिससे सभी लोग भूखे रह जाते हैं। उसी प्रकार इस शहर में लोगों की भीड़ ने पानी की कमी और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे मुद्दों को लगातार जन्म दिया है। कई राज्यों में मौजूद वहां कि खाद्य संपदा के सही उपयोग से उस राज्य में रोजगार की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। सरकारें आती और जाती हैं, शहर व गांव सबको बेहतर बनाने का वादा करके तत्काल सुर्खियां बटोरती हैं। लेकिन अगर थोड़ा ध्यान से देखें, तो अधिकांश शहरों में अवैध रूप से निर्माण नजर आएगा। इस तरह खुद से धुआं करके आप साफ रास्ता नहीं खोज सकते।  


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