यमुना में सत्ताइस साल बाद खिला कमल
राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जहां सत्ताइस साल बाद भाजपा अपनी सरकार बनाने जा रही है। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में भाजपा ने 48 सीटें अपने नाम दर्ज कर ली है, वहीं आप 22 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। वर्ष 2015 में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में कुल 70 में से 67 सीटें जीतकर राजधानी दिल्ली में अपनी सरकार बनाई थी। वहीं भाजपा केवल तीन सीटें ही जीत पाई थी। इसके अतिरिक्त कांग्रेस वर्ष 2015 की तरह इस साल भी विधानसभा के चुनाव में अपना खाता खोलने में एक बार फिर असफल रही। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांटे का मुकाबला भाजपा और आम आदमी पार्टी में था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बसपा और माकपा को नोटा से भी कम वोट मिले। लोगों ने अपने हिस्से का भरोसा इन राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पार्टियों पर नहीं दिखाया। उन्होंने नोटा में 0.57 प्रतिशत वोट दिए, जबकि बीएसपी को 0.55 और सीपीआई-एम को केवल 0.01 प्रतिशत ही वोट मिले। इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को क्रमशः 0.01 प्रतिशत और 0.53 प्रतिशत वोट मिले। सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, चुनाव आयोग ने पहली बार ईवीएम पर नोटा का विकल्प दिया। यह विकल्प उन मतदाताओं के लिए है, जो अपने हिस्से का वोट मैदान में उतरे किसी भी उम्मीदवार पर भरोसा न करने को ही दर्शाता है। वहीं नोटा विकल्प से पहले, चुनाव संचालन नियम 1961 के तहत फॉर्म भरने का विकल्प मौजूद था लेकिन, उसमें मतदाताओं की गोपनीयता से समझौता होता था।
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