समुद्र में वे सौ दिन,10 साल कम हुआ उम्र

 हम में से अधिकांश लोगों ने अपने बचपन से बडे होने के इस प्रक्रिया में एक वाक्य जरुर सुना और पढ़ा होगा कि जल ही जीवन है,लेकिन हम में से काफी कम लोग यह कल्पना किये होगें कि जल में भी जीवन है। आप अपनी आंखें बंद कर कल्पना किजिए कि आप रात में सोए और सुबह आपकी नींद खुलती है और दिन कि शुरुआत होती है पानी के भीतर से जहां हजारों तरह के जलीय जीव, वनस्पतियां हैं। इस कल्पना से परे देखे तो हम इंसान, मछलियों की तरह न तो पानी से ऑक्सीजन ले सकते हैं और न ही करोड़ों लीटर पानी का दबाव झेल सकते हैं। इसलिए पनडुब्बी में ऑक्सीजन लेकर इंसान पानी के भीतर जाते हैं और प्रेशर मेंटेन करते हैं।अभी आपकी सुबह की शुरूआत हुई है लेकिन इस आधुनिक सांसारिक जीवनशैली से काफी अलग है ,जहां आपसे बात करने वाला कोई नहीं है,और न ही एक फोन के आर्डर पर जोमैटो वाला खाना, न हर दिन सुनाई देने वाले सड़को पर वाहन,किसी शहर या गांव की जमीन पर आंखें खोलते ही आपको जो चारोंतरफ भागदौड़ नजर आती है,ये सब आपको नजर नहीं आएगा। ये सपने जैसा कल्पना को हकीकत में बदलने वाले अमेरिकी नौसेना के एक पूर्व गोताखोर और कॉलेज में प्रोफेसर जोसेफ दितुरी हैं। जिन्होंने फ्लोरिडा की लार्गो सिटी में 30 फीट गहरे पानी में मौजूद समुद्र में 100 दिन रहकर उन्होंने पानी के नीचे की दुनिया को बहुत करीब से देखा है,समुद्र में रहकर मानव शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है । इस प्रक्रिया को समझना आसान बना दिया। दितुरी ने पानी के नीचे रहते हुए जो बदलाव महसूस किए, उनमें से एक यह था कि दबाव के कारण उनका शरीर आधा इंच सिकुड़ गया। वहीं प्रारंभिक निष्कर्षों में उनकी नींद, कोलेस्ट्रॉल के स्तर और सूजन के स्तर में भारी सुधार हुआ । दूसरी ओर डीएनए परीक्षणों सहित व्यापक चिकित्सा जांचों से पता चला कि डिटूरी ने बहार आने के बाद काफी तरोताजा महसूस किया क्योंकि वह जैविक रूप से युवा हो गया था। चिकित्सा मूल्यांकन के बाद, यह पाया गया कि दितुरी के टेलोमेरेस, गुणसूत्रों के सिरों पर डीएनए कैप जो आमतौर पर उम्र के साथ सिकुड़ते हैं, पर तीन महीने पहले की तुलना में 20 प्रतिशत लंबे हो गए थे। यानी विज्ञान की भाषा में कहे तो सर्टिफिकेट वाले जन्मदिन से 10 साल कम हो गए हैं। दितुरी बताते हैं कि समुद्र के भीतर वे सौ दिन वाकई जादुई थे।


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