भारत के कुछ हिस्से जहां जाने के लिए भारतीयों को भी परमिट की आवश्यकता

 आप में से काफ़ी कम लोग जानते होगें, भारत में कुछ ऐसी हिस्से हैं, जहां जाने के लिए आपको इनर लाइन परमिट (ILP) प्राप्त करना ज़रूर होता है ।  ये दरअसल भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास संवेदनशील जगहें हैं इन जगहों पर परमिट का जरूरत पड़ जाती हैं ताकि इन क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके।

ILP एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ है जिसे संबंधित राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है। यह भारतीय नागरिकों को देश के अंदर किसी संरक्षित क्षेत्र में निश्चित अवधि के लिये यात्रा की अनुमति देता है। आइए जानते हैं किन जगहों पर लागू होता है

पूर्वात्तर राज्यों में हमारा मिजोरम जो म्यांमार और बांग्लादेश से सटी सीमाओं के साथ विभिन्न स्वदेशी जनजातियों का घर है, आप जब भी यहां आते हैं आपको इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है, जिसे मिजोरम सरकार के संपर्क अधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है और ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।जब आप हवाई यात्रा करते है तो आप लेंगपुई हवाई अड्डे, आइजोल में भी आप आईएलपी ले सकते हैं ।  दो प्रकार के आईएलपी उपलब्ध हैं – अस्थायी (15 दिन) और नियमित (छह महीने)।

 वहीं हमें सिक्किम में संरक्षित क्षेत्रों में  त्सोमगो-बाबा मंदिर, नाथुला दर्रा, दज़ोंगरी ट्रेक, सिंगालीला ट्रेक, युमेसामडोंग, गुरुडोंगमार झील, ज़ीरो पॉइंट, युमथांग और थांगु-चोपता घाटी जैसे सुदूर संरक्षित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा जारी परमिट की आवश्यकता होती है। टूर ऑपरेटरों या ट्रैवल एजेंटों की सहायता से, बागडोगरा हवाई अड्डे और रंगपो चेक पोस्ट पर परमिट प्राप्त करना संभव है।सबसे सरल है ऑनलाइन साइट पर देख कर जानकारी प्राप्त करना ।

मणिपुर में घूमना है चुंकि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर मणिपुर में, परमिट की आवश्यकता दिसंबर 2019 में लागू हुई। जबकि एक अस्थायी परमिट आपको 30 दिनों का होता है, नियमित परमिट 90 दिनों के लिए वैध रहता है।  परमिट प्राप्त करने के लिए वैध राष्ट्रीयता प्रमाण और तस्वीरें आवश्यक हैं।

वहीं नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश में भी इनर लाइन परमिट बनाना आवश्यक है।

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