सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा के लिए जंग लड़ता झारखंड
झारखंड की राजधानी से महज 35 किलोमीटर की दूरी पर चेरुआटारी गांव हैं।सड़क , बिजली और पानी जैसे मूलभुत सुविधाओं की भरी भरकम कमी से जूझ रहा है, शुक्रवार (29.03.2024) को गांव वासियों ने बताया कि हर दिन महिलाओं को पानी के लिए 2 किलोमीटर तक का सफ़र तय करना पड़ता है।
पथरीली राहों और कटिली पगडंडियों को गांव वाले दिन भर में 5 से7 बार नापते हैं। बुजुर्ग हो चुंकि पियरकी देवी बताती हैं कि जब से वो शादी करके गांव आई तब से वो पानी के लिए संघर्ष कर रही है,एक दिन पानी लाने के दौरान फिसल कर गिर गई थी, जिसके वजह से उनके दांत भी टूट गए थे।
शौचालय जो दैनिक क्रिया में शामिल है, उसके लिए लोगो को घर से बहार जाना पड़ता है ,सरकार ने शौचालय निर्माण करवा दिया लेकिन पानी की सुविधा ही नहीं है।एक कहावत है, पूरे गांव को कंप्यूटर दे दिए लेकिन गांव में बिजली नहीं दिए
सरिता देवी कहती हैं,चुनाव प्रचार में हमारे गांव में सभी पार्टियों के लोग वोट मांगने आते हैं, और दुनियाभर के वादे भी करते हैं ,पर होता कुछ भी नहीं ।
गांव वालों ने कहा घर, सड़क, बिजली,पानी और बच्चों के लिए स्कूल नहीं है।इस साल होने वाले 19अप्रैल से लोकसभा चुनाव में वोट नहीं देने का फैसला लिए हैं।
यह जमीनी हकीकत सिर्फ राज्य की राजधानी तक नही सीमित है, बल्कि झारखण्ड के कई गावों में मूलभुत सुविधाओं से लोग जूझ रहे हैं,लोग अपने हिस्से का अधिकांश जीवन पानी भरने में लगा रहे हैं।
झारखंड में कई गावों में विकास के नाम पर सड़के हैं,लेकिन दम तोड़ती सूरत में,घर है लेकिन पक्के वो भी ना के बराबर, स्कूल खुले हैं लेकिन शिक्षकों के भरी अभाव में है,पीने के पानी से लेकर चिकित्सा व्यवस्था तक सब कुछ ठप हैं।
दुनियाभर की वादें करने वाली पार्टियां एक बार फिर चौखट का दरवाजा खटखटाने के लिए तैयार हैं, लोग जो वादे सुनते सुनते बुजुर्ग हो गए,अब धीरे धीरे ही सही पर सियासत के झूठे चेहरों को पहचानने लगे हैं ।
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