जादू-टोना और काला जादू समाज के लिए ज़हर रोकथाम के लिए असम विधानसभा में पेश किया नया विधेयक

 असम हीलिंग (बुराइयों की रोकथाम) प्रथा विधेयक 2024,   राज्य के विधानसभा में 21 फ़रवरी को पेश किया गया।

 विधेयक को संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से पेश किया,सरमा ने पहले कहा था कि ईसाई धर्म प्रचार पर अंकुश लगाने के स्पष्ट लक्ष्य के साथ जादुई उपचार प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

प्रस्तावित कानून सामाजिक जागृति को बढ़ावा देने और “निर्दोष व्यक्तियों का शोषण करने से लेकर किसी को नुकसान पहुंचाने की इच्छा रखने के इरादे से उपयोग की जाने वाली गैर-वैज्ञानिक उपचार प्रथाओं” को खत्म करने के अलावा अज्ञानता और खराब स्वास्थ्य पर आधारित हानिकारक प्रथाओं के खिलाफ सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक सुरक्षित, विज्ञान-आधारित वातावरण को बढ़ावा देने का प्रयास करना है।

विधेयक की धारा 3 के अनुसार, सरकार को कुछ बीमारियों और स्वास्थ्य विकारों के इलाज के समाज में मौजुद  जादुई उपचार पद्धतियों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

 विधेयक में “अमानवीय, जादुई उपचार” प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रमुख धाराएं शामिल हैं। जैसे  धारा 5 सरकार को किसी भी कृत्य या इन प्रथाओं को बढ़ावा देने पर दंडित करने का अधिकार देती है, जबकि धारा 6 इसे बढ़ाकर एक साल की कैद, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या ₹50,000 का जुर्माना, या दोनों शामिल है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, छह मौतें मानव बलि से जुड़ी थीं, जबकि 68 हत्याओं का कारण जादू-टोना था,ये जो मामले सामने हैं क्योंकि ये दर्ज़ हो पाया ऐसे कई मामले सामने नही आते हैं।

देश के सबसे पढ़े लिखे राज्यों में एक केरल जहां दो महिलाओं को घर बुलाया गया उसके बाद जादू-टोना किया और फिर गला रेतकर हत्या कर दी. उनके शरीर को टुकड़ों में काटा और फिर दफना दिया. महिलाओं की हत्या के बाद उनके खून को दीवारों और फर्श पर छिड़का. ये सब इसलिए किया ताकि घर में धन-दौलत आए. ये स्वास्थ्य से भी जुड़ा है कई लोग डॉक्टर के पास ना जाके किसी जादू टोना वाले के पास जाते हैं और अपने हाथों स्वयं और अपने परिवार को मौत के हवाले करते हैं।

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