एंडोमेट्रियोसिस,जो ‘पीरियड दर्द’ से परे है ,भारत में 43 मिलियन महिलाएं पीड़ित

 शोधकर्ताओं ने सरकार को एंडोमेट्रियोसिस से निदान के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश बनाने की सलाह दी है, एंडोमेट्रियोसिस से भारत में लगभग 43 मिलियन महिलाएं पीड़ित हैं।

 एंडोमेट्रियोसिस के रोगियों में, गर्भाशय के ऊतक के समान ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ते हैं, जिससे अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, आंत, मूत्राशय और अन्य क्षेत्रों पर घाव बन जाते हैं।

 अध्ययन का श्रेय दिल्ली स्थित द जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के भागीदारों के सहयोग से किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट है की दुनिया भर में लगभग 10 प्रतिशत महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करता है,जो असहनीय दर्द, आंत्र समस्याओं और बांझपन सहित अन्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

 हालाँकि अधिकांश महिलाओं में इसका निदान वयस्कता में होता है, लेकिन ऐसा भी देखा गया है की किशोरावस्था में ही दर्द का अनुभव होना शुरू हो जाता है , लेकिन उनके लक्षणों को अक्सर महिला परिवार के लोग और समाज – मासिक धर्म होने का एक दुर्भाग्यपूर्ण हिस्सा मानकर खारिज कर देता है ।

 समाज के कई हिस्सों में महिलाओं से संबंधित बीमारियों पे खुल के बातें नहीं हो पाती, उनका इलाज समय पे नही होता , प्रत्येक वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के मौत के करना उनकी आम बीमारी होती है जिसका देखभाल और इलाज समय पे नही हो पता

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