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Showing posts from March, 2025

देश की राजधानी में नाबालिग ने कार से बच्ची को कुचल दिया, इन मामलों के आंकड़े चौंका देने वाले हैं

दिल्ली के पहाड़गंज में एक 15 वर्षीय नाबालिग ने दो वर्षीय बच्ची को कार से कुचल दिया। इस घटना को सीसीटीवी फुटेज में देखा गया, जिसमें दो वर्षीय बच्ची खेल रही है। उसके सामने दो अन्य बच्चियाँ भी दिखती हैं, जो स्कूटी के पास खड़ी होती हैं। वहाँ कुछ लोग मौजूद हैं, जो आपस में बातचीत कर रहे हैं। बच्ची खेलते-खेलते अपनी गली में बैठ जाती है। तभी पड़ोसी 15 वर्षीय नाबालिग गली से कार निकाल रहा होता है। कार बच्ची के नजदीक थोड़ी धीमी होती है, लेकिन अचानक नाबालिग ने जैसे ही कार आगे बढ़ाई, बच्ची कार के पहिए के नीचे आ गई। सामने से दौड़ते हुए एक व्यक्ति आया और बच्ची को कार के नीचे से बाहर निकाला। इसके बाद बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान दो वर्षीय बच्ची ने दम तोड़ दिया। आँकड़े बहुत कुछ कहते हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 2023-2024 में नाबालिग ड्राइवरों के कारण कुल 11,890 सड़क दुर्घटनाएँ हुईं। इन तमाम घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? यह प्रश्न स्वयं से पूछा जाना चाहिए।

अमेरिकी महिला ने बताया भारत में बच्चों की परवरिश करना अमेरिका से बेहतर क्यों.

 विदेश की चकाचौंध अक्सर लोगों को आकर्षित करती है, और कई लोग अमेरिका जैसे देशों में बसने का सपना देखते हैं। इस सपने को पूरा करने के लिए कुछ लोग गैर-कानूनी तरीकों का सहारा लेते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनका सब कुछ घर, परिवार, पैसा और यहाँ तक कि जीवन भी दाँव पर लग जाता है। इसके पीछे कानून की कमियाँ तो हैं ही, साथ ही बेईमान अप्रवासी एजेंट भी लोगों को विदेश ले जाने के नाम पर ठगते हैं। जो लोग इस चमक-दमक में अपने देश की असली खूबियों को नहीं देख पाते, उन्हें अमेरिकी मूल की क्रिस्टन फिशर से प्रेरणा लेनी चाहिए। क्रिस्टन का मानना है कि अमेरिका में बच्चों की परवरिश करने की तुलना में भारत में यह करना कहीं बेहतर है। लगभग चार साल पहले भारत आईं क्रिस्टन फिशर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनका एक बच्चा गली में चल रहा है। वीडियो के ऊपर लिखा था, "भारत में पले-बढ़े बच्चों को क्या लाभ होंगे?" अपने कैप्शन में उन्होंने कई कारण बताए कि भारत में बचपन बिताना अमेरिका से बेहतर क्यों है। ये कारण इस प्रकार हैं: 1. सांस्कृतिक जागरूकता और अनुकूलनशीलता: भारत में बच्चे विभिन्न संस्कृतियों, भाषा...